कोणार्क सूर्य मंदिर कहाँ है | निर्माण ओर इतिहास

दोस्तों आज हम कोणार्क मंदिर के बारे में बात करने वाले हैं, जो दुनिया में एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ सूर्य को पूजा जाता है कोर्णाक सूर्य मंदिर को किसने बनाया, कब बनाया और क्यों बनाया गया आज हम यह जानेंगे तो कोर्णाक सूर्य मंदिर के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप इस आर्टिकल को अंत तक ज़रूर पढ़ें।

कोणार्क मंदिर जिसे सूर्य मंदिर भी कहा जाता  है, यह दुनिया का एक ऐसा  मंदिर है जहाँ कोई भी भगवान नहीं है इस मंदिर में सूर्य (सुन) को भगवान मान कर पूजा किया जाता है, यह मंदिर भारत के ओडिशा राज्य में स्थित पूरी डिस्ट्रिक के चंद्रभागा नदी के किनारे बनाया गया है, कोणार्क मंदिर को 13वी सेंचुरी में बनाया गया था,

 

कोणार्क मंदिर किसने ओर कैसे बनाया था-

 

ओडिशा का नाम जब उत्कला हुआ करता था उस वक़्त एक राजा थे जिनका नाम है लांगुला नरसिंघा देव यह राजा गंग वंश के थे, लांअगुला नर्सिगहा देव सूर्य को भगवान मानते थे ओर वो सूर्य भगवान के एक भक्त थे उनके आदेश में कोणार्क मदिर को बनाया गया था, इस मंदिर को बनने में बहुत ही कठिन ओर दुःख सेहेना पड़ा था कारीगरो को।

 

इस मंदिर को बनाने के लिए 1200 कारीगर को दिन रात एक करके काम करना पड़ा था, उन्ही  1200 कारिगरों में से श्रेठ सदासिव समानता राय महापात्रा ओर उनका सहयोगी बिसु महाराणा थे जिनकी देख रेख में मंदिर बन रहा था, 1200 कारीगरो ने 12 साल(ईयर) मेहनत करने के बाद भी  ये मंदिर का  उपरी हिस्सा यानि मंदिर के कुम्भ नही बन पाए थे।

 

क्योंकि राजा लांगुला नरसिंघा देव को मंदिर के ऊपर मैग्नेटी कैलास बनवाना था पर वो होने ही पर था की देख के राजा ने क्रोधित हो के कारिगरों को बोलने लगे की 12 सल होने के लास्ट नाईट तक भी अगर यह मंदिर बन के तैयार नही हुआ तो में सब का सर काट दुंगा, यह सुन कर 1200 कारीगरों की मन में चिंता आ गयी।

 

1200 कारीगरों में से श्रेस्ठ कारीगर बिसु महराणा थे जो जब वो कोणर्क मंदिर को निर्माण करने आये थे तब उनके घर में उनके एक बेटा पैदा हुआ था जिनका नाम था  धरमा बोधा (धर्म) वो अब 12 साल के हो गये थे धर्म अपने पापा का चेहरा बचपन से नही देखा था तो वो अपने माँ से ज़िद्द करने लगा की मैं अपने पापा को देखना चाहता हूँ।

 

यह सुन के धर्मं के माँ परेशान होकर एक दिन उसे खुदी कोणार्क जाकर देख आने को बोली ओर साथ में उनके अपने घर के आंगन में लगा हुआ बार के फल को लेजाने के लिए कहते थे क्योंकि बिसु महाराणा अपने बेटे को नही देखे थे नहीं धर्मं उन्हें देख थे तो पहचान के लिए बार का फल धर्मं को लाना पड़ा था।

 

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धर्मा कोणार्क जाने के लिए घर से निकला ओर पता पूछते पूछते कोणार्क नगरी में पहुँच गया ओर अपने पापा को अपने परिचय दिया यह देख के पिता बिसु महाराण बहुत खुश हो गये, धर्मं ने वहां सबको दुखी नजर में देख के पिता बिशु महाराणा को वो दुःख के कारन पुछ्ते है तब बिषु महारणा  ने बॉलर है की 12 साल के आज आखरी रात है।

 

आज अगर यह मंदिर के ऊपर चुमक के कैलास नही बन पाए तो राजा  कल सुबह सबको मृत्यु दंड देगा, यह देख के धर्मं चिन्तित हो जाता है ओर थोड़ी देर बाद पिता के पास आकर बोलता है की क्या उस काम के लिए मंदिर के ऊपर में जा सकता हूँ, यह सुन के पिता बिशु महाराणा असाचार्य हो जाता है क्यों की उस वक़्त धर्मं 12 साल के ही थे।

 

धर्मा भले ही छोटे थे पर वो एक माहा कारीगर के बेटे थे जिनका शरीर में एक कारीगर का खून बह रहा था, धर्मा की  जिद्द के वजह से पिता बिसु महाराणा  ने मंदिर को जाने का अनुमति देते है उर धर्मं झट से ऊपर जाकर करके जो कम बड़े बड़े कारिगरों ने नही कर पा रहे थे उन काम को कुछ घण्टो में करके मंदिर से उतर आता है।

 

यह देख के सब लोग हैरान हो जाते है ओर खुशियों से झुम जाते है, थोड़ी देर बाद उन्ही कारिगरों में से कुछ लोग यह बाते करते है की मंदिर तो बन गया पर राजा को अगर इस बात पता चला की मंदिर का कलस हम नही किसी एक 12 साल के बच्चे ने लगाया है तो राजा ने हमारा सर् आवश्य काट देंगे।

 

नहीं नहीं हमे कुछ करना पडेगा यह बातें उन्ही सभी कारी गारों में फिर एक चिंता के कारन बन गयी यह खबर सभी करीगरो ने बिसु महराणा को अकार बताए तो वो भी चिंता में पड़ गए, जब धर्मं को यह बातें पता चला तब वो सोच ने लेगा को जिसका जनम होता है वो कभी न कभी मरता है क्यों न इन्हीं 1200 लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान को कुर्बान कर दिया जाए, 

धर्मा ने एक पिता को अपने सोच के बारे मे बताया यह सुन के पिता बिशु महाराणा रोने लगे ओर अपने बेटे को साथ लेकर कहीं दूर चले जाने को बोलने लगे तब उन्ही 1200 कारिगरों ने महाराणा को एक जान बचाने के लिए इतने लोगो के जन खतरे में डालना चाहते हो तो तुम्हारा मर्ज़ी, महराना सबसे श्रेस्ठ थे।

 

इसलिए सभी लोग उन्हें डर डर के बोल रहे होते पर धर्मं को ओर सहन नही हो रहा था वो पापा को ज़िद्द करने लगे ओर बोलने लगे की पापा के संकट में बेटा अगर साथ ना दे तो वो बेटा जीवित रह कर भी मर जाता है यह कह कर वो कोणार्क मंदिर के ऊपर चढ़ जाते है ओर पिता को आखरी बार प्रणाम करके वो मंदिर से चंद्रभागा नदी को छलांग लगाकर अपने जान के क़ुर्बान कर देते है।

 

यह देख के बिसु महराणा जोर जोर से चीला के रोने लगते है, सुबह होने के कुछ देर बाकी थी, राजा को पता चल जाता है की मंदिर निर्माण पूरा हो गया है तो वो सुबह होते ही देखने आ गये ओर समानता राय उर्फ बिशु महाराणा के बहुत प्रसंसा करते है।

 

राजा मंदिर के शुभारंभ के लिए एक तिथि चूनते है पर वो जो तिथि चूनते है उसे समानता राय ने मना कर देते है की ये तिथि सही नही है पर राजा अपने जिद्द में अटल रहते है ओर अपनी कही हुई तिथि में मंदिर के लिए जनज्ञान करते है यह देख के समानता राय उर्फ बिसु महाराणा वहां से चले जाते है।

 

कुछ ही सालों बाद मंदिर का एक एक हिसा टुटना शुरू हो जाता  है यह देख के राजा चिंता में पड़ जाता है ओर सोचने लगता है की सामन्त रॉय की बातें ठीक थी पर तब बहुत देर हो चुकी था , मंदिर के बहुत हिसे धीरे धीरे टुटना शुरू हो गए यह देख के मंदिर को बंद कर दिया गया, कुछ साल बाद मंदिर के चारो ओर बड़े बड़े पेड़ हो गए थे।

 

मंदिर जहाँ था वहां जंगल बन गया था, जब अँग्रेज शासन चल रहा था तब अंग्रेजों को इसी मंदिर के इतिहास के बारे में पता चला तब अंग्रेजों ने मंदिर को पूर्ण उद्धार किया था ओर आज जो मंदिर आप देख रहे हो वो टुटा हुआ मंदिर है, पर आज भी मंदिर को देख के उसी के कला ओर संस्कृति के अनुमान लगा सकते हो,

 

कोणार्क मंदिर चुम्बक के रहस्य-

 

   कोणार्क मंदिर के ऊपर एक कलस था जो के चुम्बक का था जिसे 12 साल के बच्चे (धर्म) ने लगाया था वो कोई एक साधारण चुम्बक नही था, वो एक ऐसा चुम्बक था की कोई भी चिड़िया हो या फिर कोई भी वस्तु कोर्णाक मंदिर के ऊपर से गुजरे तो वो खींच लेता था।

 

इतनी ताकत थी वो चुम्बक में, लोंगो का मानना है वो ऐसा एक रहस्यमयी चुम्बक था ओर उसे वो चुम्बक के ऊपर से कारीगिरी की हुई थी वो एक को भी खींच लेने की ताकत थी उस चुम्बक में पर वो चुम्बक अभी नही है उसे किसीने चुरा लिया है।

 

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कवारक मंदिर कुछ रोचक बातें-

 

1- कोणार्क मंदिर के पुनः उदार अंग्रेजों ने किया था

 

2- कोणार्क मंदिर को गैंग बंस के राजा लन्गुला नरसिंघा देव के आदेश में समानता राय उर्फ विशु महराणा ने बनाये थे।

 

3- कोणार्क मंदिर के पास जो चंद्रभागा नदी था वो सुख के अभी कई कि:मी दूर चला गया है यकीन नही होता है के धर्मं ने उसी मंदिर के ऊपर से छलाँग लगाई थी नदी में मगर यह बात सच्च है

 

4- कोणार्क मंदिर के मुख्य हिस्सा यानि मंदिर के ऊपर कलस धर्मं ने लगाया था जो कोणार्क मंदिर के मुख्य कारीगर का बेटा था,

 

5- कोणार्क मंदिर के ऊपर कलस लगाने के लिए धर्मं को अपनी जान गवानी पड़ी थी

 

6- कोणार्क मंदिर में लोग पूजा करने कम और मंदिर को सिर्फ देखने के लिए हज़ारों की गिनती में हर दिन जाते है।

 

7- कोणार्क मंदिर दुनिया का एक ७म रहस्य मंदिर है,

 

8- कोणार्क मंदिर को दुनिया के लगभग सभी लोग जानते है-

 

9- कोणार्क मंदिर में कभी क्लोर नही लगाया जाता है उनके कला उर संस्कृति को बचाए रखने के लिये।

 

10- नया 10 रूपए की नोट में जो चक्र के निशान है वो कोणर्क मंदिर का एक हिस्सा का फोटो है,

 

11- कोणार्क मंदिर को 1200 करीगरों के दुआरा बनाया गया था।

 

12- कोणार्क मंदिर 13वीं सदी में बना।

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