पूरी रथ यात्रा की जानकारी और इतिहास | रथ यात्रा 2021

पूरी रथ यात्रा: हमारी धरती पे कुल 4 धाम है उनमे से एक धाम श्री जगन्नाथ भगवान के प्रसिद्ध ओर सबसे पुरातन जगन्नाथ मंदिर भी है, ओड़ीशा के पूरी नगरी में स्थिति इस मंदिर में कृष्णा भगबान श्री जगनाथ के रूप में स्थित है जहाँ श्री जगन्नाथ भगवान को हर साल रथ में बैठा कर अपने मौसी के घर लेकर जाया जाता है,

जिस सवारी पर बैठा कर भगवान श्री जगन्नाथ जी को लेकर जाते हैं उसे रथ कहा जाता है।

 

लोग उस रथ की रस्सी को खींचते है और लेकर जाते हैं इस पूरे प्रोसेस को रथ यात्रा कहा जाता है। भगवान जगन्नाथ को 10 दिन बाद फिर वापस मंदिर में लेकर आया जाता है, 2021 में रथ यात्रा 12 जुलाई (सोमवार) को है, तो चेलो आज हम पूरी के जगन्नाथ महाप्रभु के रथ यात्रा के बारे इतिहास से लेकर  वर्तमान तक का सफर के बारे में बात करते है।

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पूरी रथ यात्रा का इतिहास हिंदी में

 

पूरी में रथ यात्रा के उत्सव पिछले एक हज़ार (1000)  साल से किया जा रहा है, यह रथयात्रा हर साल असद के सुकलापहए अर्थात जुलाई के महीने में होता है, यह रथयात्रा का महा उत्सव एक या दो दिन नही पूरा 10 दिन तक लगा रहता है।

 

विश्व में रथ यात्रा के अलावा कोई भी त्यौहार 10 दिन तक लगातार नही मनाया जाता है, रथ यात्रा की आरम्भ में जितना जोरो शोरों से भगवान के पूजा अर्चना करके रथ को खींचा जाता है उसी तरह 10 दिन तक उतना ही धुमधाम से बाकी के दिन तक भी चलता रहता है ओर श्रद्धालुओं का भीड़ 10 दिन तक उतना ही भरा रहता है।

 

पूरी रथ यात्रा क्यों मनाया जाता है

पूरी रथ यात्रा
पूरी रथ यात्रा

पूरी में रथ यात्रा इसलिए होता है क्योंकि सदियों पहले जब जगन्नाथ प्रभु के बहन सुभद्रा अपनी ससुराल से मइके आई थी तो प्रभु जगन्नाथ को सुभद्रा ने नगर भ्रमण करने के लिए इच्छा करते है तो भगवान ने अपनी बहन के बातों को टाल नही सकते इसलिए तीनों भाई बहनों ने नगर परिभ्रमण करने के लिए रथ में सवार होते है।

 

उसी वक्त प्रभु जगन्नाथ के मौसी गुंडिचा को सुभद्रा घर आने के खबर जब मिलता है तो उन्होंने तीनों भाई बहनों को अपने घर बुलाते है, वहाँ पर तीनों भाई बहन अपने मौसी के घर 10 दिन तक रह जाते है, इसिलिये रथ यात्रा 10 दिन तक होता है।

 

शुरुआत  से लेकर वर्तमान समय तक ऐसे ही पारम्परिक तरीके से पूजा होता है, रथ खींचा जाता है, जगन्नाथ मंदिर में श्री जगन्नाथ के साथ अपनी भाई भलभद्र एंड अपने बहन सुभद्रा भी रहते है जो की एक ही मंदिर में पूजा पाते है, रथ यात्रा के लिए हर सल नया नया रथ बनवाया जाता है निम् के पेड़ से, एक जगन्नाथ के लिए दूसरा सुभद्रा के लिए ओर तीसरा भलभद्र के लिये, तीनों रथ के अलग अलग नाम भी है, जैसे-

 

पूरी रथ यात्रा के तीनों रथ के नाम:-

Puri rath yatra ke 3 rath

1- जगनाथ भगवान के रथ के नामनंदीघोसा है जिसे गरुड़ धुवाज भी कहा जाता है, यह रथ 45.6 फ़ीट लम्बा होता है उर इस रथ में 16 टायर होता है, इस जगनाथ प्रभु के रथ को लाल ओर पीला कपडे से घेर कर सजाया जाता है।

 

2- सुभद्र के रथ का नाम- दुर्पडालन है,  इस रथ में 12 टायर होते है ओर रथ की लंबाई 44.6 फ़ीट रखी होती है, इस रथ को प्रभु जगनाथ के रथ ओर भलभद्र के रथ के बीच में रखा जाता है।

 

३-भलभद्र के रथ का नाम- तालध्वजा है, इस रथ में 14 टायर होते है, इस रथ की लम्बी 44 फ़ीट होती है।

 

2021- पूरी रथ यात्रा

 

इस साल पूरी रथयात्रा होगा या नहीं यह आने वाला वक़्त बताएगा क्योंकि पिछले साल 2020 में रथयात्रा हुआ तो था लेकिन श्रद्धालुओं को वहाँ जाने की अनुमति नहीं थी क्योंकि उस वक़्त covid 19 का कहर छाया हुआ था और सरकार की तरफ स्व भीड़ होने पर रोक लगाई गई थी। यदि इस साल रथयात्रा होता है तो आप जाओगे या नहीं यह हमें कमेंट कर ज़रूर बताएं।

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