Dussehra Festival Essay 2021 Or History

दोस्तों जैसा कि आप जानते हैं कि 2021 में दशहरा 15 सितंबर को आने वाला है इसलिए आज हम आपको दशहरे से जुड़े कुछ तथ्य बताने वाले हैं और दशहरा निबंध इन हिंदी आपके सामने पेश करने वाले हैं, विजयदशमी का यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत ओर बुराई के खात्मे को प्रस्तुत करता है, दशहरा दस दिन तक मनाया जाता है जिसमें लोग दस दिन तक व्रत रखते है और कुछ लोग दशहरे के दसवें दिन यानी विजयदशमी के दिन व्रत रखते हैं।

दशहरा हिंदु धर्म के लोगों का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो कि पूरे भारत मे बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है, यह भारत के अलग अलग राज्यों में अलग अलग तरीकों से मनाया जाता है मगर इसमें एक समानता सब जगह दिखाई दे जाती है कि दशहरे के अंतिम दिन रावण के पुतलों को जला कर बुराई पर अच्छाई की जीत को दिखाया जाता है। दशहरे से कुछ दिन पहले रामलीला का आयोजन किया जाता है तो चलिए दोस्तों नीचे विस्तार से जानते हैं दशहरा के बारे में।

 

दशहरा का इतिहास सबंध

दशहरा का मतलब है दस सिर को हरने वाला त्योहार, कहा जाता है कि राजा रावण के दस सिर थे और वह भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था मगर उसके अहंकार ओर बुराई की वजह से राजा रावण को श्री राम जी ने मार गिराया था अर्थात बुराई पर अच्छाई की जीत हुई थी, बस उस दिन की याद में यह दशहरा का त्योहार हर साल मनाया जाता है। बात तब की है जब भगवान श्री राम जी को उनके पिता राजा दशरथ ने 14 साल के बनवास पर भेज दिया था जिसमें श्री राम के साथ उनकी पत्नी माता सीता जी और उनके भाई लक्ष्मण जी भी गए थे।

तभी एक दिन राजा रावण वहां से सीता माता का हरण कर ले जाता है फिर श्री राम जी वानर सेना के साथ मिल कर राजा रावण की सेना पर विजय प्राप्त करते हैं और राजा रावण को मार देते हैं, अर्थात बुराई पर अच्छाई की जीत होती है जिसके चलते यह त्यौहार हर साल अच्छाई की जीत को प्रस्तुत करने के लिए मनाया जाता है।

 

दशहरा से पहले राम-लीला

राम लीला का मतलब राम की लीला अर्थात भगवान श्री राम जी की कहानी, दशहरा से कुछ दिन पहले भारत के अलग अलग राज्यों के बहुत सारे शहरों कस्बों में राम-लीला का आयोजन किया जाता है जिसमें रामायण के इस किस्से को दिखाया जाता है कि कैसे भगवान राम ने राजा रावण पर विजय प्राप्त की थी, राम-लीला में भगवान श्री राम के पूरे 14 सालों के बनवास के जीवन के कुछ खास किस्सों के बारे में दिखाया जाता है जिसमें सीता माता को धोखे से रावण का लेकर जाना, ओर फिर भगवान राम जी द्वारा रावण का वध करना।

इस राम-लीला को देखने के लिए लोगों में बहुत उत्साह होता है और यह कुछ दिन चलने वाली राम लीला को लोग एक दिन भी मिस नहीं करते बहुत उत्साह के साथ भगवान श्री राम जी की इस लीला को दिखाया ओर देखा जाता है।

 

रावण को जलाना

इस दस दिन चलने वाले दशहरा के त्यौहार के अंतिम दिन अर्थात विजयदशमी वाले दिन रावण, मेघनाथ ओर कुम्भकर्ण के पुतलों को जलाया जाता है, इस दिन राम-लीला का भी अंतिम दिन होता है जिसमें भगवान श्री राम के द्वारा राजा रावण को मार दिया जाता है, फिर दशमी वाले दिन शहर के किसी बड़े मैदान में रावण के पुतलों को फूंका जाता है, इस दिन पूरे देश मे बहुत उत्साह वाला माहौल होता है लोग बहुत खुशी से दशहरा के इस कार्यक्रम को देखने के लिए जाते हैं।

जहाँ यह कार्यक्रम होता है वहाँ बहुत से लोगों की भीड़ सुबह से ही आना शुरू हो जाती है और पूरा दिन इस दिन का आनंद लेटे हुए शाम को रावण, मेघनाद ओर कुम्भकर्ण के पुतले जलने के बाद लोग अपने घरों को वापस लौट जाते हैं, लोग घरों को वापस जाते हुए मिठाईयां ओर बच्चों के लिए खिलोने खरीदते हैं।

 

दशहरा का संदेश

दशहरा का त्योहार हमें बहुत तरह के संदेश देता है जिसमें सबसे पहला तो यही है कि हमेशा अच्छाई के रास्ते पर चलो क्योंकि बुराई को लाख शक्तिशाली होने के बाद भी हार का मुँह देखना पड़ता है, दूसरा सन्देश यह है कि हमें कभी भी अपने शक्तिशाली होने का अहंकार नहीं करना चाहिए। भगवान राम की तरह अपने माता पिता के आदेशों का पालन करना चाहिए जैसे भगवान श्री राम अपने पिता दशरथ के एक बार कहने पर ही 14 साल के बनवास पर चले गए, लक्ष्मण की तरह आज्ञाकारी भाई बनना चाहिए, जिसने हर हाल में अपने भाई श्री राम जी का साथ दिया।

बुराइयों से दूर रहना चाहिए और अपने अंदर के छुपे रावण को दशहरे में जलाए जाने वाले रावण के पुतले की तरह जला का नष्ट कर देना चाहिए।

 

हमारे विचार

जैसे कि आपको पता ही है कि हर साल दशहरा के दिन रावण के पुतलों को पूरे देश भर में जलाया जाता है मगर फिर भी हमारे देश में लाखों ऐसे रावण है जो बुराई के सहारे लोगों को खत्म करने पर लगे हुए हैं इसलिए हर साल रावण का पुतला जलाने के साथ ही हमें अपने अंदर के रावण को भी जलाना होगा, क्योंकि वह सतयुग था जब सिर्फ एक रावण था जिसको भगवान श्री राम ने खत्म कर दिया था मगर यह कलयुग है जिसमें लगभग हर चेहरे के पीछे आपको एक रावण छुपा दिखाई दे जाएगा। हमारे इस अंदर के रावण को खत्म करने वाले लाखों राम तो नही आएंगे इसलिए हमें राम नाम का सहारा लेकर जय श्री राम बोलते हुए अपने इस अंदर के रावण को जला कर खुद ही खत्म करना होगा।

हमारा यह आर्टिकल अंत तक पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद हम उम्मीद करते हैं कि आपको दशहरा पर यह निबंध पसंद आया होगा।

 

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