होली पर निबंध | Holi Essay In Hindi 2021

जैसे कि आप जानते ही है भारत देश मे हर महीने में 4-5 त्योहार और उत्सव आते रहते हैं और किसी किसी महीने में तो यह त्योहारों कि गिनती 10 तक हो जाती है इसकी वजह यह है कि भारत में हर धर्म के लोग रहते हैं और सभी धर्मों के त्योहारों को यहाँ मनाया जाता है। ज़रूरी नहीं कि जिस धर्म का त्यौहार है सिर्फ वही धर्म के लोग उसको मनाए यहाँ पर सभी धर्मों के लोग दूसरे धर्म के लोगों के त्योहार को बहुत धूम धाम से मनाते हैं।

इन सभी त्योहारों में से एक है “होली” का त्यौहार इस त्योहार का सबंध हिंदू धर्म से है इसलिए इस त्योहार को भारत मे बहुत बड़ी गिनती में लोगों के द्वारा मनाया जाता है और इस त्योहार को सिर्फ हिन्दू धर्म के लोग ही नहीं बल्कि भारत मे बसने वाले अन्य कई धर्मों के लोगों द्वारा इस त्योहार को मनाया जाता है।

इसलिए आज हम आपके लिए होली पर निबंध लेकर आये हैं जिसमें होली त्योहार के बारे में लिखा गया है, यह एक रंगों का त्योहार है जो बुराई पर अच्छाई की जीत से सबंध रखता है तो चलिए दोस्तों शुरू करते हैं होली पर निबंध।

 

होली त्योहार का इतिहास

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होली का त्योहार मनाने के पीछे एक इतिहासिक घटना जुड़ी हुई है, जिसमें अहंकार पर आस्था की जीत को बताया गया है। एक हिरण्यकश्यप नाम का अहंकारी राजा था जो बहुत अहंकारी था और यही चाहता था कि सब उसकी ही भक्ति करें उसके सिवा किसी की भक्ति ना करें और एक उसकी बहन होलिका थी जो राजा का इस काम में पूरा साथ देती थी परंतु राजा का एक बेटा प्रह्लाद था जो हर वक्त भगवान की भक्ति में लीन रहता था और उसकी भगवान में बहित आस्था थी जो राजा हिरण्यकश्यप ओर उसकी बहन होलिका को बिल्कुल भी पसंद नहीं था।

इसलिए राजा और उसकी बहन होलिका प्रह्लाद पर हर वक्त अत्याचार करने की कोशिश करते रहते थे परंतु वह प्रह्लाद का कुछ नहीं कर पाते थे बहित बार राजा और होलिका ने प्रह्लाद पर अत्याचार करने की कोशिश की परंतु प्रह्लाद की आस्था भगवान में इतनी थी कि वह हर बार बच जाता। आखिर एक दिन राजा हिरण्यकश्यप ओर उसकी बहन होलिका ने प्रह्लाद को जला कर खत्म के बारे में सोचा, जो होलिका को करना था होलिका को एक चुनरी वरदान में मिली हुई थी जिसको जलाया नहीं जा सकता था।

होलिका वही चुनरी को ओढ़ कर प्रह्लाद को अपनी गोद में बिठा कर जलती आग की चिता में चली गयी, परंतु प्रह्लाद की आस्था और भक्ति ने प्रह्लाद का यहाँ भी साथ दिया और प्रह्लाद को आग छू तक ना पाई वही होलिका आग में जल कर राख हो गयी। आखिर अहंकार पर आस्था की जीत हुई जिसकी खुशी में लोगों के द्वारा होली का त्योहार मनाया जाता है। ओर होली से एक दिन पहले लोगों के द्वारा होलिका दहन किया जाता है।

 

होली रंगों का त्योहार

 

होलिका दहन के अगले दिन होता है वह होली का दिन जिसको पूरे भारत में कई धर्मों के लोगों के द्वारा मनाया जाता है, इस दिन बच्चों से लेकर बूढ़ों तक में खुशी का माहौल होता है और चारों तरफ रंगों की बहार से पूरा भारत रंगीन हो उठता है। बच्चे बजुर्ग महिलाएं सब इस दिन रंग बिरंगे रंगों से एक दूसरे को रंग लगाते हैं और ख़ुशियाँ मनाते हैं।

कहते हैं इस दिन तो दुश्मन भी दुश्मनी को भूल कर दोस्त बनकर एक दूसरे को रंग लगाकर ख़ुशियाँ मनाते हैं, पूरा दिन यह रंगों का त्योहार बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस रंगों के त्योहार पर पूरा जश्न मनाया जाता है और ढोल नगाड़ों के साथ इस दिन को मनाया जाता है। जिसको देखो वह इस दिन लाल हरे पीले रंग के गुलाल से रंगा होता है, बच्चे भी पिचकारियों में रंग भरकर एक दूसरे पर रंग डालते हुए दिखाई देते हैं।

कुछ लोग रंगों से छुप भी रहे होते हैं मगर बच्चे उनके ढूंढ कर रंग लगा ही देते हैं, और इसके साथ ही हस्सी मज़ाक के साथ इस रंगों के त्योहार होली में खुशियाँ भर जाती है। कुछ लोग ढोल नगाड़ों के सातग गीत गाकर दूसरे लोगों का मनोरंजन कर रहे होते हैं इस दिन पूरा वातावरण ख़ुशियाँ ओर रंगों से भरकर झूम उठता है। और शाम के समय भोजन मिठाईयां और कई स्वादिष्ट पकवानों को बना कर खाया जाता है साथ मे बैठ कर हँसी मज़ाक से यह पूरा दिन बीत जाता है।

 

बदलते वक्त के साथ होली को मनाने का ढंग ओर तरीका भी बदल रहा है कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इस दिन मदिरा ओर अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं जो कि बिल्कुल भी सही नहीं है इसके साथ ही कुछ लोग रंगों की जगह कीचड़ फेंक कर होली के बहाने अपनी दुश्मनी निकालने लगे हैं जो कि इस पावन पवित्र त्योहार वाले दिन बिल्कुल शोभा नहीं देता।

 

निष्कर्ष:

 

होली अहंकार पर आस्था की जीत का त्योहार है, जिसको हम रंगों का त्योहार भी कहते हैं और यह भारत में सभी लोगों खासकर हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा बहित ही उत्साह से मनाया जाता है। पर इस दिन कुछ लोग इसको गलत तरीके स्व भी मनाते हैं जो कि हमें नहीं करना चाहिए हमें इस दिन को सही तरीके से और खुशी से मनाना चाहिए।

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