jagannath temple general knowledge | निर्माण, इतिहास

जगन्नाथ पुरी मंदिर एक हिन्दू लोगों का मंदिर है, तृतीया युग जब खत्म हुआ तो कलयुग में भगवान विष्णु जगननाथ के रूप में एक मूर्ती के अंदर रहने लगे, जिसे हम जगत के नाथ जगन्नाथ कहते है ओड़ीशा के पूरी नामक एक जगह है जिसे श्रीखेत्र भी कहा जाता है इसी जगज में श्री जगन्नाथ का मंदिर है, जहाँ हर दिन भगवान की पूजा अर्चना की जाती है ओर हर साल भगवान जगन्नाथ को रथ में बिठा कर अपने मौसी के घर लाया जाता है इस कार्यक्रम को रथयात्रा के नाम से जाना जाता है।

दुनिया की चारों धामों में से एक धाम पूरी है जहाँ हर दिन हज़ारों की गिनती में श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने के लिए आते है ओर रथ यात्रा के दिन तो पूरी में लाखों की गिनती में  श्रद्धालु आते है इस रथयात्रा का दृष्य देखने लायक होता है जिसे की सुंदरता को शब्दों में बयाँ नही किया जा सकता।

 

श्री जगन्नाथ पूरी मंदिर किसने बनाया

 

इस मंदिर के निर्माण के बारे में किताबों में लिखे अनुसार कुछ और कहा जाता है और पुराने बुजुर्ग लोगों द्वारा बताई जाने वाली अलग जानकारी है तो पहले हम देखते हैं कि इस मंदिर के निर्माण के बारे में किताबों में क्या लिखा गया है:-

बहुत वक़्त पहले जब ओडिशा का नाम कलिंगा हुआ करता था उस वक्त ओडिशा के हिन्दू राजा अनंतबारमा चोडगंग देवा ने मंदिर निर्माण शुरू करवाया था मंदिर के जगमोहन और बिमान भाग इनके शासन काल 1078-1148 में बनवाये थे उसके बाद सन 1197 में कलिंग के शासक अनंग भीम देव ने इसी मंदिर को पूर्ण रूप दिए था यानि मंदिर का पूरा निर्माण किया था।

 जब मंदिर पूरा बन कर तैयार हो गया तब पूजा अर्चना शुरू किया गया और यह लगभग सन 1558 तक चलती रही फिर 1558 में अफ़्ग़ानिस्तान के जनरल कालापहाड़ ने ओडिशा पर अटैक कर दिया था जिसकी वजह से मंदिर को बहुत नुकसान पहुंचा था और यहाँ पूजा अर्चना बन्द करा दी गयी।

इसके बाद रामचन्द्र खुरदा ने एक स्वतंत्र राज्य स्थापित किया और फिर मंदिर में पूजा शुरू हुआ तबसे लेकर आज तक कोई भी बाधा नहीं आयी और आज वहाँ लाखों की गिनती में श्रदालु आते हैं।

 

जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़ी कहानियाँ

 

लोगों का मानना है कि मंदिर को किसी ने नही बनाया था यह मन्दिर खुद बना था, कयी हजार साल पहले  एक किसान खेती करने के लिया जमीन खोद रहा था ओर इसी मंदिर के कुम्ब यानि मंदिर के चोटी दिखाई दी तब वो किसान यह देख कर हैरान हो गया ओर गाओं के लोगों को बुलाया तब सब लोग यह क्या है उसे जनने के लिए सब लोग मिटटी को खोदने लेगे मंदिर इतना बड़ा है की वो लोग महीना भर तक भी खोद नहीं पाए।

 फिर एक दिन वो लोग खोद लिए एक बिशाल काया मंदिर को जब मंदिर को पूरी तरीके से खोदा गया तो मंदिर के दरवाजे देखने को मिले तब वो लोग मंदिर के अंदर क्या है वो जानने के लिए कोशिश किए लोगो का मानना था की इसी में कुछ छुपा होगा और वोलोग जब दरवाजों को तोड़ने लगे, अंदर गए तो कुछ नही था सिर्फ मंदिर के अंदर ३ मूर्तियाँ थी एक जगन्नाथ दूसरा भलभद्र ओर उनकी बहन सुभद्रा की लोगों को यह देख कर बहुत ही आश्चर्य होने लगे।

लोग बोलने लगे अरे यह क्या यहां तो ३ पुतला है फिर वहां एक आकाश बानी होती है की आप जिसे पुतले कह रहे हो वो पुतला नही भगवान बिष्नु जी जगन्नाथ का अवतार लेके कलयुग में आए है।

यह सुन के सभी लोग हैरान हो गए ओर कहने लगे हे भगबान हम तो ठहरे अज्ञानी तो इस पुतले को हम क्या करें जिससे भगवान हमसे संतुष्ट होंगे पर वहाँ तो सुनने  वाला कोई नहीं था। लोगों के मन में चिंता होने लगी इसी तरह रात हो गयी ओर जब लोग सोने लगे तब उस रात गाओं के आसपास लोगो के सभी के सपने में भगवान जगन्नाथ के दर्शन हुए तब सभी लोग हैरान हो गये जब सुबह होने लगी तो लोग फिर से मंदिर की तरफ दौड़ने लगे और अपने रात वाले सपने के बारे में एक दूसरे को बताने लगे।

तब लोगों ने उस मंदिर की साफ सफाई करके मंदिर में पूजा आराधना करना शुरू कर दिया वो लोग जो खाते थे वो लोग वही चीज़ को लाकर मंदिर में भोग चढा देते थे क्योंकि उनको पूजा कैसे किया जाए वो पता नहीं था तबसे लेकर आजतक उसी विधि से ही पूजा किया जाता है, आज भी मंदिर में हर एक दिन 60 तरह के भोजन भगवान को दिया जाता है अर्थात भोग चढ़ाया जाता है।

 

जगन्नाथ पूरी मंदिर के बारे में अन्य जानकारी-

 

 1- पूरी मंदिर के एक नही अन्य भी कई नाम है जैसे श्रीखेतरा, नीलचक्र, जगन्नाथ धाम, नीलगिरि, चेकडोळा, ज़ांगा कलिग, नीलमणि।

 

2 – पूरी मंदिर के ऊंचाई 214 फीट है ओर यह  मंदिर 40000 वर्ग में फैला हुआ है।

 

3- पूरी मंदिर के कुम्भ में जो चक्र लगा हुआ है उसका नाम नील चक्र है वो भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र है, नीलचक्र के भर 2200 किलोग्राम और ऊंचाई 11 फ़ीट है जो हैरानी की बात है क्योंकि देखने में यह काफी छोटा लगता है।

 

4- जगन्नाथ मंदिर के ऊपर जो ध्वज़ लगा है उसी के नाम पतितपावन है,

 

5- जगन्नाथ मंदिर में श्री जगन्नाथ के साथ उनके भाई भलभद्र और उनके बहन सुभद्रा भी है।

 

6- हर साल में भगवान जगन्नाथ को रथ में बैठा कर ले जाया जाता है अपने मौसी के घर जिसे हम रथ यात्रा कहते है, यह हर सल होता है, हर सल नया नया रथ बनाया जाता है।

 

Last Words: 

 

सो फ्रेंड रथ यात्रा के बारे में पूरा जानने के लिए नीचे कमेंट कर बताएं कि आपको यह जानकारी कैसी लगी और मुझे बताएं कि क्या आप रथ यात्रा के बारे में पूरी जानकारी लेने चाहते हैं ताकि मैं आगे इसके बारे में आर्टिकल लिख सकूँ। धन्यवाद

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