The Golden Temple Essay in hindi

गुरुद्वारा श्री हरिमंदिर साहिब : हमारा देश ऋषियों मुनियों और गुरुओं पीरों का देश है, जो अलग अलग धर्मों के सुम्मेल से एक भारत बनता है यहाँ हर धर्म के धार्मिक स्थल मौजूद हैं और सभी लोग अपने धार्मिक स्थलों पर जाते हैं और यह लोगों की ज़िंदगी का एक हिस्सा बना हुआ है।

 

श्री हरिमंदिर साहिब (Golden Temple Amritsar) की तीर्थ यात्रा

 

मैं इस वक़्त भारत पंजाब में पड़ते अमृतसर के गुरुद्वारा श्री हरिमंदिर साहिब में मौजूद हूँ, जो कि सिखों का एक धार्मिक स्थल है जहाँ लाखों की गिनती में सिख धर्म के लोग आते हैं और अन्य धर्मों के लोग भी यहाँ बहुत बड़ी गिनती में आते हैं, मैं इस वक़्त अपने पूरे परिवार के साथ श्री हरिमंदिर साहिब में मौजूद हूँ। जब से मैं बड़ा हुआ हूँ तब से आज मैं पहली बार यहाँ आया हूँ, हम पूरे परिवार के साथ बस का सफर करके यहाँ पर पहुँचे थे, आज 15 जून का दिन है और मुझे आज भी कल वाली बातें याद है।

 

श्री हरिमंदिर साहिब निर्माण और इतिहास

 

बस में सफर करके आते हुए मुझे पिता जी ने बताया था कि श्री हरिमंदिर साहिब अमृतसर हमारे पूरे सिख समुदाय का धार्मिक पवित्र तीर्थ स्थल है। इस स्थल के निर्माण का कार्य सिखों के पाँचवे गुरु “साहिब श्री गुरु अरजन देव” जी के द्वारा साईं मियां मीर जी से नींव रखवा कर शुरू किया गया था। इस नगर का पहला नाम रामदास पुर था, इस तरह पिता जी पूरे सफर में हमें श्री हरिमंदिर साहिब से जुड़ी और भी बातें बताते रहे।

 

पिता जी से श्री हरिमंदिर साहिब से जुड़ी कहानियाँ और इतिहास सुनते हुए पता ही नही चला कब हम अमृतसर पहुंच गए, बस “बस स्टैंड” पर आकर रुकी और हम वहाँ से रिक्शा चालक के श्री हरिमंदिर साहिब जाने के लिए निकल गए और कुछ ही वक़्त में वहाँ पहुँच गए। श्री हरिमंदिर साहिब की मुख्य इमारत में प्रवेश करने से पहले हमने अपने जोड़े (पैरों में पहने हुए चप्पल या जूते) वहाँ जोड़ा घर में जमा करवा दिए और अपना समान जो भी हमारे पास था उसे हमने समान घर में जमा करवा दिया।

 

श्री हरिमंदिर साहिब में प्रवेश

 

इसके बाद हमने हाथ पैर धोए और अंदर की तरफ प्रवेश किया, श्री सरोवर साहिब की परिक्रमा में पहुंच कर पूरे परिवार के साथ श्री हरिमंदिर साहिब की तरफ मुँह करके माथा टेका, इसके बाद बाईं तरफ से परिक्रमा करने की शरुआत की। परिक्रमा का पहला मोड़ मुड़ने के बाद माता जी औरतों वाली जगह पर इशनान करने चले गए, मैं मेरे पिता जी और बड़ा भाई हम सरोवर की सीढ़ियों पर संगल को पकड़ कर इशनान करने लग गए।

 

दुख भंजनी बेर व्रक्ष

 

दुख भंजनी बेर व्रक्ष के नीचे से सिर झुकाते हुए हम आगे की तरफ बड़े। दूसरा मोड़ मुड़ने के बाद हम बाबा दीप सिंह जी के स्थान पर पहुँचे, यहाँ सिर झुका कर नमस्कार किया, पिता जी ने हमें बाबा दीप सिंह जी की शहादत के बारे में बताया। रास्ते में हमने देखा कि जगह जगह पर ठंडे पानी की सेवा चल रही थी।

 

दर्शनी डिओडी श्री हरिमंदिर साहिब

 

तीसरे मोड़ से मुड़कर हमने प्रशाद लिया, प्रशाद लेने के बाद हम दर्शनी डिओडी पहुंचे, यहाँ सब ने प्यार से सिर झुकाया। यहाँ काफी भीड़ भी थी और वहाँ पर मौजूद सेवादार लाइनों में चलने को बोल रहे थे, कड़ाह प्रशाद की पर्ची यहाँ रखे ड्रम में डाली और देग लेकर हम पुल के रास्ते गुरुद्वारा साहिब की तरफ चल पड़े।

 

अंदर जाकर जब मैंने हरिमंदिर साहिब की बाहर सजावट को देखा तो मैं हैरान रह गया, सभी दीवारों पर सोने की परतें लगी हुई थी, श्री हरिमंदिर साहिब की दीवारें लगभग पूरी तरह से सोने की परतों से ढकी हुई थी, इस सोने की सजावट की वजह से ही श्री हरिमंदिर साहिब को गोल्डन टेम्पल के नाम से भी जाना जाता है।

 

श्री हरिमंदिर साहिब के चार दरवाज़े

 

हम माथा टेकने के बाद बाहर आये और बैठ कर कीर्तन सुनने लगे, पिता जी ने बताया कि यहाँ दिन रात कीर्तन चलता रहता है। मैंने देखा कि श्री हरिमंदिर साहिब के चार दरवाजे है, जिसके बारे में मैंने पिता जी से पूछा तो उन्होंने बताया कि यह चार दरवाजे चार धर्मों ( हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई) का प्रतीक हैं, दरबार साहिब में किसी भी धर्म का किसी भी दरवाजे से आ सकता है यह सभी धर्मों के लिए खुले हैं।

 

यह स्थान सभी धर्मों का है, यहाँ किसी भी धर्म के साथ भेद भाव नहीं किया जाता और सबसे बड़ी बात जो में सुन कर खुद हैरान रह गया कि सिखों के इस धार्मिक स्थल की नींव एक मुस्लिम साई मियाँ मीर के द्वारा रखी गयी थी। इसके बाद हम श्री अकाल तख्त साहिब माथा टेकने के लिए गए और उसके बाद हम यहाँ मौजूद अजैब घर गए जहां सिख धर्म के इतिहासिक तस्वीरें और इतिहास लिखा हुआ था।

 

अन्य जानकारी

 

उसके बाद हम जलियांवाला बाग की तरफ गए जहां हमने शहीदों को याद किया और उनको प्रणाम किया इस तरह से हमारी यह यात्रा पूरी हो गयी और हम शाम को अपने घर लौट आए यह श्री हरिमंदिर साहिब की यात्रा मेरे लिए एक यादगार यात्रा थी जिसे में कभी नहीं भुला सकता।

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